एक जाट वीर जवान की जुबानी

मेरे एक करीबी मित्र अभी भारत से लौटे जहाँ उनकी जाट रेजिमेंट के एक जवान से मुलाक़ात हुई थी | वह जवान कश्मीर के कूपवाड़ा में अपनी पोस्टिंग से अभी छुट्टी पर आये हुए थे | हम लोग जो सीमा पर समय व्यतीत नहीं करते, उनके लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे वीर जवानों  की बातें सुने | वार्तालाप के प्रमुख बिंदु थे:

१. सीमा पर मनोबल एक बड़ी समस्या है (निम्नलिखित कारणों से)

२. वहां पर दैनिक जीवन बहुत कठिन और बहुत ही खतरनाक है | न केवल छोटे हथियारों से फायरिंग होती हैं, परन्तु अक्सर बमबारी भी होती रहती है, जो की मनःस्थिति को बुरी तरह प्रभावित करता है |

३. कश्मीर के स्थानीय लोग हमारे जवानो के खिलाफ हैं और इससे उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि मानो वो एक विदेशी जगह पर हैं | जवान का कहना था कि “हमारा वहां कोई नहीं है” |

४. जब जवान अपने हथियार वापस लौटा कर छुट्टियों पर जाने के लिए निकलते हैं तो स्थानीय लोग द्वारा उनके सैन्य बसों/ट्रकों पर पथराव किया जाता हैं | यह तब होता है जब जवान शस्त्र-हीन एवं सुरक्षा-हीन होते हैं | इसके अलावा इस समय जवान चौकन्ने भी नहीं रहते क्योंकि वो छुट्टियों पर जाने के लिए थोड़े आराम की स्थिति में होते हैं |

५. सीमा पर सैनिकों के मारे जाने की संख्या बहुत अधिक हैं, और जब हमारे जवान वहां लम्बे समय की पोस्टिंग के लिए जाते हैं तो उनके लिए यह बात चिंता का विषय बन जाती है |

६. जवानों को यह भरोसा नहीं है की अगर उनके साथ कुछ बुरा हो गया तो सरकार और देशवासी उनके परिवार और आश्रितों की ठीक-ठाक देखभाल करेंगे |

हमें देश के नागरिक होने के नाते सीमा पर तैनात अपने जवानो की सहायता करनी होगी | उसके लिए निम्नलिखित कुछ कदम उठाए जा सकते हैं :

१. हमारी सेना के खिलाफ कुछ नहीं बोला जाए | देश के कुछ लोगों के लिए सेना की कीमत पर अपने “मानवाधिकार प्रमाण-पत्र” को साबित करना एक फैशन सा हो गया है | भारतीय सेना खुद ही अत्यंत अनुशासित और जागरूक है, और अगर कोई उल्लंघन करता भी है तो उससे निपटने के लिए उनके पास सुनिश्चित प्रक्रियाएं हैं | जब सेना की नौकरी इतनी अविश्वसनीय रूप से कठिन होने पर भी हमारी मीडिया का एक हिस्सा उन पर लगातार झूठे आरोप लगाता रहता है तो ये उनके मनोबल पर बुरा प्रभाव डालता है |

२. आज कश्मीर की स्थिति बेहद तनावग्रस्त है और इसको देखते हुए हमारे जवानों की वहां पर लम्बे समय के लिए  पोस्टिंग बहुत तनावपूर्ण होती है | इसलिए हमारे जवानो को कश्मीर में अच्छी सुविधाओं की आवश्यकता है | हमे ऐसे क्षेत्रों में तैनाती होने पर वेतन-वृद्धि किए जाने पर भी चर्चा शुरू करनी चाहिए | हमारे जवानों से देश के लिए इतने लम्बे समय तक अत्यंत तनावग्रस्त परिश्थितियों में रहने की अपेक्षा करना उचित नहीं है |

३. हमारे जवानो को समर्थन दिया जाना चाहिए, और ये सभी को अपने स्तर पर छोटे-छोटे तरीकों से करना चाहिए | अगर आप अपने क्षेत्र से जवानों को जानते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि वे जानते हों कि उनके बलिदानों की आपके लिए कितनी महत्वता है | स्कूल के बच्चों से उन्हें पत्र लिखवाएं | और भी धन्यवाद कहने के ऐसे अन्य तरीको के बारे में सोचे |

४. हमारे देश में ऐसे भी तथाकथित “नेता” हैं जो “सेना स्त्रियों को ले जाएगी और उनका बलात्कार करेगी”, आदि, जैसी बातें राष्ट्रीय टीवी पर कहते रहते हैं | हमें ऐसे राजनैतिक लाभ के लिए सेना का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए | दुनिया में और कोई ऐसा देश नहीं है जहाँ की सेना के बारे में कोई राजनेता ऐसा गन्दा बोलकर बच सके |

५. हमारे सेवानिवृत सैनिकों को संस्थागत मदद की आवश्यकता है, विशेषतौर से शहीदों को | मैं अभी यहाँ कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका में एक बुजुर्ग आदमी से मिला— उन्होंने वियतनाम देश के दो सैन्य मिशन किये थे (1967 एवं 68 में) | उन्होंने बहुत प्रसन्नता से मुझे बताया कि “सरकार मेरा बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखती है, क्योंकि मुझे वियतनाम में गोली लगी थी”| अफसोस कि बात यह है कि हमारा जवान अगर कार्रवाई में शहीद भी हो जाए तो भी उसके परिवार को भारत सरकार से मिलने वाली सहायता के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता |

६. हमे हमारे राजनेताओं और सरकारी अफसरों पर दबाव बनाना होगा कि वे रक्षा सामग्री जैसे बॉडी आर्मर, छोटे हथियार, थर्मल इमेजिंग, एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जो जवानों की एवं उनके शिविरों की सुरक्षा में सहयोगी होंगे, उनकी खरीद में शीघ्रता करें | प्राइवेट सेक्टर को सम्मिलित कर, DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) को अधिक स्वायत्तता प्रदान कर एवं उसकी उत्तरदायित्वता स्थापित कर, और दफ्तरशाही (रेड टेप) में कटौती कर इन उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए | पूर्व रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में हालात में कुछ सुधार अवश्य आए परन्तु अभी भी हमारी मंज़िल बहुत दूर है | मौजूदा रक्षा मंत्री, जो कि वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कानून का भार भी संभाल रहे हैं, उनके स्थान पर एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री को लगाए जाने के विचार में तो अधिक सोचने की भी आवश्यकता नहीं है |

किसी मुद्दे के बारे में जागरूकता लाना हमेशा प्रथम कदम होता है, और हिन्दू-पोस्ट जैसा मंच जागरूकता ला सकता है |

भारत माता की जय |

(दीपेंद्र सिंह द्वारा हिंदी अनुवाद)


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About the Author

Vinay Kumar
Devout Hindu and practising brahmin, very interested in history and current affairs of Bharat. Do not believe in birth-based "caste" but rather varna based on swadharma and swabhava, and personal commitment to that varna's dharmas. I don't judge people by the religion they profess: every human being should be treated with equal dignity. At the same time, I don't judge a religion by the people I know who profess it. A religion, like any doctrine, should be subjected to critical examination using facts and reason.