आमिर खान और किरण राव का तलाक!

मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान ने अपनी दूसरी बीवी किरण राव को तलाक दे दिया। आज जैसे ही यह खबर प्रसारित हुई, वैसे ही इंटरनेट पर प्रतिक्रिया आने लगी। और लोग कहने लगे कि यह हिन्दू लड़कियों को फंसाने का एक नया तरीका है। पहले उनसे सेक्युलर बनकर शादी की जाए और फिर दस पंद्रह साल बिताने के बाद एक या दो बच्चे पैदा करने के बाद तलाक दे दिया जाए।

यह एक पक्ष है! परन्तु इसका दूसरा पक्ष अधिक महत्वपूर्ण है। यदि शादी नहीं चल पा रही है, तो स्वेच्छा से अलग हो जाना चाहिए। परन्तु कितनी बार? क्या एक भी शादी नहीं चलेगी? आमिर खान ने पहली शादी या कहें निकाह अपने बचपन की प्यार रीना से किया था और फिर जब आमिर खान अपनी शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचे तो उन्होंने रीना को तलाक दे दिया और किरण राव से निकाह कर लिया।

और अलग होने के पीछे कारण क्या हैं? इस विषय में किरण राव का कुछ समय पहले का एक इंटरव्यू ध्यान में रखना चाहिए।

किरण राव ने कहा था किआमिर की लाइफ में खुद को फिट करना मेरे लिए एक बड़ी चुनौती था, क्योंकि आमिर अपनी पहली बीवी रीना से तलाक के बाद काफी मुश्किल वक्त से गुजर रहे थे।’ किरण ने आगे कहा – ‘आमिर खान जैसे पति के साथ जिंदगी गुज़ारना काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उन्हें पार्टी करने का बिल्कुल शौक नहीं है, लाउड म्यूजिक पसंद नहीं है। बहुत लोगों को ऐसा लगता है कि आमिर काफी सीरियस किस्म के इंसान हैं जो सही नहीं है। वो काफी खुशमिजाज इंसान हैं, जो अपने परिवार से पूरी तरह से जुड़े हुए हैं।’

इससे ऐसा लगता है जैसे खटास शायद व्यक्तिगत कारणों से आनी आरम्भ हुई थी। क्या आमिर खान अपनी पत्नी के लिए बदलने के लिए जरा भी समायोजन करने के लिए तैयार नहीं थे? यह तो खैर उन दोनों की निजी बातें हैं। परन्तु कहते हैं न कि सेलेब्रिटीज की निजी जिन्दगी निजी इसलिए नहीं रह जाती है क्योंकि लोग आपको आदर्श मानने लगते हैं। और आप जो करते हैं, वही वह अपनी ज़िन्दगी में करते हैं।

आज जारी किये गए संयुक्त वक्तव्य में दोनों ने कहा कि

इन पंद्रह खुशनुमा सालोंके सफ़र में हमने जीवन भर के अनुभव, खुशी और खुशियाँ साझा की हैं और हमारा रिश्ता विश्वास, आदर और प्यार में ही बढ़ा है। अब हमने अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया है। अब हम मियाँ-बीवी न होकर सह-अभिभावक और एक दूसरे के लिए परिवार हैं। हमने कुछ समय पहले ही अलग होने की योजना बना ली थी और फिर समझौते पर पहुंचे कि हम अलग रहेंगे मगर उसी तरह साथ भी रहेंगे जैसे एक्सटेंडेड फैमिली रहती हैं।

हम अपने बेटे आज़ाद के समर्पित अभिभावक के रूप में रहेंगे और उसे साथ मिलकर प्यार से पालेंगे। हम अपने पेशेवर रिश्ते को भी कायम रखेंगे!”

इस विषय में तसलीमा नसरीन का ट्वीट गौरतलब है

उन्होंने लिखा है कि वह तलाक के खिलाफ नहीं हैं, पर जो दंपत्ति खुश होने का दिखावा करते हैं और जबकि वह खुश होते नहीं हैं, वह थोडा हैरान करने वाला होता है।

पर फिर वही प्रश्न उभर कर आता है कि आखिर पहली हिन्दू पत्नी से मुसलमान बच्चे पैदा कर तलाक दिया, और फिर दूसरी हिन्दू पत्नी से बच्चे पैदा करके तलाक दिया, इसमें क्या कोई पैटर्न है जैसा लोग कह रहे हैं या फिर वास्तव में निजी मामला है?

जो भी हो यह निजी मामला होते हुए भी निजी नहीं है क्योंकि यह दो धर्मों से जुड़ा हुआ है और एक ऐसी छवि से जुड़ा हुआ है, जो फेक है! मिस्टर परफेक्शनिस्ट वही होना चाहिए जो रिश्तों को भी परफेक्शन की तरह निभा ले जाए, कपड़ों की तरह रिश्ते न बदले!


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