महानता इतनी सस्ती नहीं है कॉमरेड!

भीमा कोरेगांव मामले में हुई हिंसा में आरोपी फादर स्टेन की मुम्बई में हुई मृत्यु के बाद उन्हें महान बनाकर शोक व्यक्त किया जा रहा है। क्या महानता इतनी सस्ती है, कॉमरेड? क्या महानता इतनी सस्ती है कि उसे देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के आरोपी पर आप लगाएंगे? यह कुछ अधिक ही है। और यह इस देश का सौभाग्य है कि आम जनता आपकी इस गढ़ी हुई महानता की परिभाषा को समझने लगी है।

वह जानती है कि आपके प्रिय फादर स्टेन एक माओवादी थे, कोई बलिदानी नहीं! उन्होंने आदिवासियों की पहचान बदले बिना उनके लिए शायद कोई काम नहीं किया था। वह जानती है कि चूंकि उसने वर्ष 2014 में अपने विवेक का प्रयोग कर नरेंद्र मोदी सरकार को चुना है, जो आपको पसंद नहीं है, तो आप समय समय पर देश में हिंसा फैलाने का कार्य कर रहे हैं, फिर मौका चाहे भीमा कोरेगांव हो या सीएए, पैटर्न और उद्देश्य एक ही होता है, तभी आम लोगों की ओर से फादर स्टेन की मृत्यु पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है। प्रतिक्रिया आप की ओर से है!

भारत का मानस मृत्यु पर आत्मा की शान्ति की प्रार्थना करता है और फादर स्टेन के लिए भी की होगी, मगर फिर भी वह उन घटनाओं को नहीं भूला होगा जो फादर स्टेन के कारण हुईं। भारत की आम जनता का एक ही प्रश्न है कि उसके मत द्वारा चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का इतना प्रयास आप जैसे कथित बुद्धिजीवियों द्वारा क्यों किया जा रहा है और क्यों एल्गार परिषद के बाद हुई हिंसा पर आप कुछ नहीं बोले थे? क्या हिंसा भड़काकर ही आप जनता के मत को पलटना चाहते हैं? यही प्रश्न आपसे है और यही प्रश्न माओवादी फादर स्टेन से आम जनता का रहा था।

और यदि आपके कथनानुसार यह संस्थागत मर्डर है, तो फिर से आपको विचार करना होगा क्योंकि जिस देश में वह अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रहे थे, और किया भी, उसी देश में न्यायालय के निर्देश में उनका उपचार सबसे बेहतर अस्पतालों में से एक होली फैमिली अस्पताल में हो रहा था, जो शायद ईसाइयों द्वारा ही संचालित हो रहा है। इस अस्पताल की कुछ तस्वीरें दूरदर्शन में पत्रकार, लोकप्रिय कार्यक्रम दो-टूक के एंकर, एवं लेखक अशोक श्रीवास्तव ने शेयर की और कहा कि आलोचना करने वालों को देखना चाहिए,

इतना ही नहीं वैटिकन न्यूज़ ने भी जो खबर साझा की है, उसमे अस्पताल की इलाज की ही तस्वीर लगाई हुई है। अत: यह बात सही है कि जमानत नहीं मिली थी, क्योंकि एनआईए कोर्ट ने उनके अपराध को जमानत के योग्य नहीं पाया था, परन्तु उन्हें इलाज भरपूर मिल रहा था।

मगर फादर स्टेन को जमानत क्यों नहीं मिली थी? क्या कारण था कि जमानत याचिका रद्द हुई, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की 10,000 पन्नों की जो चार्जशीट भीमा कोरेगांव की हिंसा के मामले में प्रस्तुत की थी, उसमें वह सबसे मुख्य व्यक्ति थे। उन पर सबसे बड़ा आरोप था कि वह प्रतिबंधित माओवादी संगठन की गतिविधियों में संलग्न होने का।

वह दलितों और मुस्लिमों को देश के खिलाफ छापामार युद्ध में नियुक्त करना चाहते थे और उन्हें सशस्त्र प्रशिक्षण देना चाहते थे। और जिस प्रकार आज लेफ्ट लिबरल मीडिया फादर स्टेन के लिए आंसू बहा रहा है, ऐसा लग रहा है जैसे वह उन्हें महानता के सर्वोच्च पायदान पर स्थापित कर देगा। यह कोई नहीं पूछता कि जिन आदिवासी क्षेत्रों में शासन विकास करने के लिए, स्कूल खोलने के लिए या फिर साधारण कार्य करने के लिए भी नहीं जा सकता है, वहां पर फादर स्टेन संघर्ष के नाम पर आदिवासियों को ईसाई कैसे बना रहे थे? और संघर्ष में देश की सत्ता के खिलाफ सशस्त्र युद्ध छेड़ना कब से शामिल हो गया?

और स्वामी लगाकर आम जनता को भ्रमित क्यों किया जा रहा है? पालघर में असली स्वामियों अर्थात साधुओं की लिंचिंग पर मौन रहने वाले सभी लोग फादर स्टेन की उस सहज मृत्यु पर आंसू बहाकर महान सिद्ध कर रहे हैं, जिन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधा युक्त इलाज मिला?

और वह भी उस अस्पताल में जो उन्होंने स्वयं चाहा!

राहुल गांधी और वामपंथी इस बात को कैसे उठा सकते हैं कि उनके साथ जेल में ठीक नहीं हुआ क्योंकि एक बात को ध्यान रखा जाना चाहिए कि वह तलोजा जेल में बंद थे, और तलोजा जेल महाराष्ट्र सरकार के अधीन आती है, जिसमें कांग्रेस स्वयं साथी है। यह सरकार वामपंथियों की प्रिय सरकार है। वामपंथियों और कांग्रेसी जो आज फादर स्टेन की मृत्यु पर आंसू बहाकर उन्हें महान सिद्ध कर रहे हैं, वह कम से कम यह प्रश्न अपने प्रिय मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से पूछ सकते थे, परन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया।

क्या कारण है कि प्रदेश कांग्रेस ने एक बार भी अपनी ही सरकार के जेल के कुप्रबंधन के विषय में बात नहीं की? और वेटिकन न्यूज़ ने भी एक बार भी तलोजा जेल पर प्रश्न नहीं उठाया। तो क्या यह न माना जाए कि यह लोग भी जैसे फादर स्टेन के जाने की ही प्रतीक्षा में थे, कि जैसे ही फादर जाएं और वह शोर मचाएं!

मगर एक प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे रहा है कि आखिर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोपी को महान बनाने के इस षड्यंत्र का कारण क्या है? और क्यों बार बार इस बात को अनदेखा किया जा रहा है कि वह समाजसेवा की आड़ में भारत को तोड़ने के षड्यंत्र में शामिल थे, क्या इसलिए क्योंकि वह कमज़ोर विपक्षी नेताओं को इस सरकार के खिलाफ एक मुद्दा दे रहे थे? क्या विपक्ष उन्हें अपने हाथ का खिलौना मान रहा था?

और क्या कांग्रेस और शेष दल अब अपनी जिद्द और सुविधानुसार और बिना जनादेश के देश चलाना चाहते हैं? यह भी एक प्रश्न है, और क्या वह अपने हिसाब से न्यायालय को चलाना चाहते हैं और साथ ही वह बिना जिम्मेदारी के इस देश का विमर्श संचालित करना चाहते हैं और देश की जनता द्वारा बहुमत से चुनी हुई सरकार को गिराना चाहते हैं?

और हाँ, फादर स्टेन को फादर ही रहने दिया जाए, एक माओवादी समर्थक, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले व्यक्ति, वह कोई स्वामी नहीं हैं! स्वामी नाम लगाकर जनता को भ्रम में डालने का कार्य वह विपक्ष न करे, जो जनता को कुछ समझता नहीं है! और इस देश की जनता यही कह रही है कि महानता इतनी सस्ती नहीं है कॉमरेड!


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