हिंदू युवक की फिर हुई हत्या, सैफ अली और उसके साथी पर केस दर्ज

फिर एक बार एक हिंदू युवक की हत्या देश में हो चुकी है, जिस पर उदारवादी बुद्धिजीवी वर्ग चुप्पी साधे हुए है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार – “एक 25 वर्षीय युवक जिसने इलाके के कुछ मुस्लिम युवाओं को जुआ खेलने पर आपत्ति जताई थी, उन मुस्लिम युवकों ने उसको अपने बहन के सामने कत्ल कर दिया है। इस घटना की रिपोर्ट शनिवार दोपहर बाहरी दिल्ली के रणहौला से की गई, जिसके बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और हत्या का मामला दर्ज किया गया। मृतक शुभम ने इलाके में चल रहे एक जुआ रैकेट पर आपत्ति जताई थी और अक्सर आरोपी सैफ अली और साहिल के साथ उसकी बहस होती थी।

शनिवार को, सैफ अली और साहिल दोपहर में शुभम के घर पहुंचे, उसे बाहर बुलाया और छुरा घोंपा। उसकी बहन, जो बाहर भी खड़ी थी, मदद लेने के लिए दौड़ी, लेकिन आरोपी भागने में सफल रहे। शुभम को पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां पर शुभम ने दम तोड़ दिया।”

दैनिक जागरण की रिपोर्ट है कि शुभम की मां भी तब मौजूद थी, जब उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनकी बहन ने हमलावरों को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शुभम के परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपी सैफ अली और उसका परिवार भी उन पर जातिवादी गालियां देते थे – यह दर्शाता है कि मृतक अनुसूचित जाति समुदाय से हो सकता है।

जबकि कुछ इसे केवल ’रूटीन अपराध’ के रूप में दबाने की कोशिश करेंगे और इसे ‘सांप्रदायिक रूप’ न दिया जाए का फरमान ज़ारी करंगे, दिल्ली और आसपास के राज्यों में ऐसी हत्याओं के पैटर्न से पता चलता है कि ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं। 2017 में, एक सार्वजनिक शौचालय के कार्यवाहक 21 वर्षीय राहुल को सलमान और शाहिद ने चाकू मार दिया था, जब उन्होंने शौचालय में उनकी ड्रग्स लेने पर आपत्ति जताई थी। डॉ. पंकज नारंग को दो मुस्लिम युवकों द्वारा उनकी बाइक पर खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने पर आपत्ति जताने के बाद भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था।श्री ध्रुव त्यागी को क़त्ल कर दिया गया जब उन्होंने अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ करने वाले मुल्सिम युवक के घर में जा कर उसकी शिकायत की।

तो जहां एक तरफ लुट्येन्स दिल्ली का विशिष्ट वर्ग चीख-२ कर ‘हिन्दू कट्टरपंथ’ को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताता है, आम हिन्दू के जीवन की सच्चाई इसके बिलकुल विपरीत है। इस्लामी कट्टरपंथ और आमूलीकरण इस प्रकार फैल गए हैं की जो हिन्दू मुस्लिम-बहुल या मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उनका जीवन नर्क बन गया है।


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