साधु सरवनन का विचित्र मामला – हिंदू साधु के जीवन की कोई कीमत नहीं

तमिलनाडु के सेलम जिले के संकागिरी तालुका में, कुंदंगल कादू पुलियम्पति, एक ऐसा सुदूरवर्ती इलाका है, जो शायद गूगल मानचित्र पर भी दिखाई नहीं देता। इसके प्रसिद्धि का एकमात्र कारण है ,तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के गृह नगर एदापद्दी गांव के इसके बगल में होना । हालांकि, पिछले कुछ दिनों से कुंदनंगल कादू, एक पुलिस अधीक्षक द्वारा साधु सरवनन के अपमान और अमानवीय यातना के चौंकाने वाले कारण के लिए चर्चा में है, जो कि बाद में साधु की आत्महत्या का कारण बना।

गांव के निवासी, 47 वर्षीय साधु सरवनन, एक सिद्धार (तमिल आध्यात्मिक परंपरा के सिद्ध अनुयायी) उप-संप्रदाय के सदस्य थे, जिन्हें सिवन अदियार या शिव के विनम्र भक्त के रूप में जाना जाता है। “समियार (पवित्र व्यक्ति) सरवनन” के रूप में लोकप्रिय यह गृहस्थ, एक तंत्र मंत्र व्यवसाई थे जो अपने गांव के, और आसपास के लोगों को अंतर्भूत क्रियापद्धती से, भूत प्रेत से बचने या बुरी आत्माओं को दूर भगाने का अनुष्ठान करते थे, भविष्य की भविष्यवाणी करते थे, अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करते थे, और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए “पवित्र सूत्र ” देते थे।

4 अगस्त 2020 को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर, थेवूर पुलिस थाने के उप अधीक्षक (एसआई) एंटनी माइकल ने साधु सरवनन को हिरासत में ले लिया। स्थानीय पुलिस के अनुसार भगवा रंग की धोती पहने सरावनन दो महिलाओं के साथ थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि वह बुरी आत्माओं से ग्रस्त थीं। महिलाओं ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि साधु ने उन्हें मदिरा पीने के लिए “मजबूर” किया था।

पुलिस का ये कहना है कि उन्होंने सरवनन को इसलिए पकड़ा था क्योंकि उन्हें उसके महिलाओं के साथ “नग्न पूजा” करने की सूचना मिली थी। गाली देते हुए और उसे “आधा नग्न” होने के लिए उपहासयुक्त व्यंग करते हुए एंटनी माइकल ने साधु की इतनी निर्ममता पूर्वक पिटाई की, कि उनकी बेंत के दो टुकड़े हो गए। उन्होंने कथित तौर पर सरवनन को दाढ़ी काटने की भी सलाह दी और नया व्यवसाय लेने की बात कही।

सरवनन के परिवार में उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्री शामिल हैं। उन्होंने पुलिस की बर्बरता देखी। उप अधीक्षक ने उन्हें “पोली(नकली) सामियार” (साधु) के रूप में कुख्यात करने की धमकी भी दी – जो अक्सर पीड़ितों और साधुओं को डराने और चुप कराने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। परिवार के अनुसार, उन्हें पुलिस द्वारा चुप रहने के लिए डराया और धमकाया गया था और सरवनन के बच्चे, जो नाबालिग हैं, को भी पीटा गया था।

सरवनन के परिवार का कहना है कि इस घटना से वह बुरी तरह से आहत और अपमानित हुए, खासकर क्योंकि वह अपने बच्चों के सामने शर्मिंदा किए गए। साधु सरवनन अगले दिन घर से चले गए और वापस नहीं लौटे। चिंतित स्थानीय लोगों और सरवनन के दोस्तों ने उन्हें बहुत ढूँढा पर वे नहीं मिले। अगले दिन सरवनन के दोस्तों और परिवार को सरवनन द्वारा भेजा गया एक व्हाट्सएप वीडियो मिला, जिसमें उन्होंने ऐंटनी माइकल को अपने अपमान के लिए दोषी ठहराया, जिससे उन्हें असहनीय तनाव और आघात हुआ था और जिसने उन्हें अपने जीवन को समाप्त करने के लिए मजबूर कर दिया था।

वीडियो में, जंगल, जो पक्षियों के गीत से गुंजायमान है अचानक वहाँ कौवों का अशुभ गुंबद हावी हो जाता है, जो कि सरवनन के जीवन के आखिरी कुछ क्षणों को एक अवास्तविक पृष्ठभूमि प्रदान करता है। उन्होंने उप अधीक्षक के व्यवहार के लिए “शक्ति की भावना” को जिम्मेदार ठहराया जिसने उन्हें बिना किसी जवाबदेही के कार्यवाही करने का हक और दंडाभाव की मिथ्या अहंकार से ओत प्रोत कर दिया था।

इस मरणासन्न घोषणा में उन्होंने अपने जीवन को समाप्त करने के फैसले के लिए एंटनी माइकल को दोषी ठहराया और कसम खाई कि वह उसके घृणित कार्य के लिए उसे मरने के बाद भी सताते रहेंगे। दो दिन बाद गांव से सटे एक जंगल में सरवनन का क्षत-विक्षत शव मिला। उनका मोबाइल फोन भी उनके पास था।

तकनीकी रूप से देखा जाए तो जैसे कि एंटनी माइकल ने साधु सरवनन को आत्महत्या के लिए उकसाया था, उनपर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है, जो कि एक गंभीर अपराध है जो संज्ञेय गैर-जमानती और गैर-यौगिक है।परंतु आश्चर्य है की इस आरोप को निंदनीय बताया जा रहा है और आशंका है कि उनके विरुद्ध कोई आरोप नहीं लगाया जाएगा, यहां तक कि विभागीय जांच भी नहीं होगी।

भयावह पुलिस बर्बरता तथा घातक हिंसा का यह शर्मनाक उदाहरण, जिसने एक साधु को अपने जीवन को समाप्त करने के लिए उकसाया, बहुत ही आश्चर्यचकित और व्याकुल करने वाला है। शायद इससे भी अधिक आश्चर्यचकित करने वाली बात है, तमिलनाडु में इस विषय के  प्रति व्यापक सार्वजनिक और मीडिया की उदासीनता। इसके विपरीत, जब तमिलनाडु के सथानकुलम में पुलिस की बर्बरता के कारण दो ईसाइयों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, तब पूरे राज्य में एक सामुदायिक आक्रोश भड़क गया था जो एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया और मानवाधिकार समूह ने भी न्याय की मांग की थी। इसी तरह पालघर में साधुओं को मारा गया था, तो प्रश्न उठता है कि हम हिन्दुओं, विशेषकर धार्मिक और आध्यात्मिक जनों, के विरुद्ध अत्याचारों पर मूकदर्शक क्यों है?

इस बीच स्थानीय पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है। हालांकि यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है, और नाराज तथा कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों ने अब पुलिस पर एंटनी की रक्षा करने का आरोप लगाया है। विचित्र बात यह है कि साधु सरवनन के मरणासन्न घोषणा के साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने के बावजूद एंटनी के विरुद्ध कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित नहीं की गई।

इस बीच मारीदास, जो एक स्पष्टवादी यू ट्यूब एक्टिविस्ट और ब्लॉगर हैं, ने एक तीक्ष्ण प्रभावशाली वीडियोसाधु सरवनन की आत्महत्या में सब इंस्पेक्टर एंटनी माइकल को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है, से इस बात पर प्रकाश डाला है कि हिंदू धर्म के लोगों, विशेष रूप से हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक संगठनों से जुड़े लोगों पर अत्याचार के विरुद्ध स्वर उठाने वाला आज कोई है ही नहीं। वह कहते है कि साधु सरवनन की मौत को लेकर तमिलनाडु में मुख्यधारा के मीडिया की चुप्पी तथा चयनात्मक उदासीनता का कारण है “तमिलनाडु के अधिकांश मीडियाकर्मी चेन्नई के लॉयला कॉलेज के उत्पाद हैं”, जो कि हिंदूफोबिया और  उदारवादी मनोभाव से युक्त है।

वे मीडिया, राजनीतिक दलों, कानून प्रवर्तन और इसाई प्रचार संगठनों के बीच एक गहरी सांठगांठ की बात करते हैं जो हिंदू धर्म संगठनों से जुड़े आध्यात्मिक और धार्मिक लोगों पर किए गए अत्याचारों को न्यूनतम रूप से दिखाने, तुच्छ बनाने या अनदेखा करने के लिए काम करते हैं।

एक अन्य वीडियो – क्या साधु सरवनन की आत्महत्या के पीछे ईसाई प्रचारक थे?, में मारीदास ईसाई और इसाई प्रचारकों के बीच अंतर बताते हैं जिसमें कि उत्तरार्ध का धार्मिक रूपांतरण का उद्देश्य है। मारीदास के अनुसार एसआई एंटनी माइकल एक ईसाई प्रचार संगठन – यीशु यहां है – के सदस्य हैं और यहां तक कि एक फर्जी विश्वविद्यालय ग्लोबल पीस यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया है। रोचक बात यह है कि एंटनी माइकल के ब्रांड के निर्माण के लिए तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इन कृत्रिम प्रमाणों का उपयोग किया जा रहा है।

“राजनीतिक दलों को भी अधिकार-आधारित दृष्टिकोण से हिंदू कारणों को उठाने की आवश्यकता है। लेकिन तमिलनाडु में द्रविड़ दलों में से किसी के लिए भी यह प्राथमिकता नहीं है, उनके अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के रुख को देखते हुए। ईसाइयों और मुसलमानों के विपरीत हिंदुओं को वोट बैंक के रूप में नहीं माना जाता है,” मारीदास बताते हैं।

उन्होंने साधु सरवनन की आत्महत्या के बारे में कई प्रासंगिक सवाल उठाए : एंटनी माइकल की तस्वीर अब तक जारी क्यों नहीं की गई है? (जिनके ठिकाने अभी तक अज्ञात हैं और कथित तौर पर उन्हें दूसरे पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया है)

मारीदास का कहना है, “एंटनी माइकल के पीछे कौन से ईसाई बल हैं? सिद्धार और साधु ऐसे लोग हैं जो ईसाई प्रचार संघटनों के धार्मिक रूपांतरण एजेंडा में बाधा के रूप में कार्य करते हैं। देश भर में साधुओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं क्योंकि वे धार्मिक रूपांतरण को बाधित करते हैं”। और वे कहते हैं कि हिंदूफोबिया गैर-अब्राह्मिक परंपराओं के बारे में जागरूकता और अज्ञानता की कमी तथा हिंदू धर्म को देखने के लिए संदर्भ के असंगत फ्रेम के उपयोग से प्रेरित है, और अब्राह्मिक मतों को श्रेष्ठ मानने वाले दृष्टिकोण के चलते हिंदू स्वरों और चिंताओं को मूक किया जाता है।

“मैं विभिन्न हिंदू परम्पराओं के नेताओं से आम दुश्मन के विरुद्ध एकजुट होने की अपील करता हूं। स्थिति खतरनाक है। राजनीतिक ताकतें, ईसाई बल और कानून प्रवर्तन एक अपवित्र गठबंधन में हैं। हिंदू युवाओं के लिए भी परंपराओं में निहित रहना महत्वपूर्ण है। सभी मतों का सम्मान करें, लेकिन मूर्ख न बनें। ज़रुरत पड़ने पर अपनी आवाज़ ज़रूर उठाइए,” वह कहते हैं।

इसी बीच, कानूनी अधिकार वेधशाला (एलआरओ) एक कानूनी अधिकार संगठन जो एक अधिकार-आधारित परिपेक्ष से हिंदू मुद्दों को संबोधित करता है, ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से संपर्क किया और जुवेनाइल न्याय अधिनियम के तहत सब इंस्पेक्टर एंटोनी माइकल और अन्य के खिलाफ कार्यवाही की मांग की क्योंकि उन्होंने साधु सरवनन के नाबालिग बच्चों पर शारीरिक हमले किये थे। एनसीपीसीआर ने मामले का संज्ञान लिया है और डीएसपी से एक सप्ताह के भीतर जांच करने और रिपोर्ट देने को कहा है।

पुलिस की बर्बरता और बाद में साधु सरवनन की आत्महत्या ने लोगों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। इंदू मक्कल काची (आईएमके) ने इस मुद्दे को हरी झंडी दिखाई और #जस्टिस फॉर सरवनन की मांग की और यहां तक कि उप अधीक्षक की एक तस्वीर भी प्रकाशित की।

श्री अर्जुन संपत, आईएमके  के अध्यक्ष, को विश्वास है कि साधु सरवनन की मृत्यु के समय की घोषणा, उन्हें न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त है और इसलिए उन्होंने एंटनी माइकल की गिरफ्तारी की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने राज्य से परिवार के लिए पच्चीस लाख के मुआवजे की मांग की है।

हालांकि, मुख्यधारा के संस्थानों और कथनों में अंतर्निहित हिंदूफोबिया को देखते हुए, जो केवल ऐसे मुद्दों को हलका और नीचा दिखाते हैं, और राजनीति, कानून प्रवर्तन और मीडिया के कुचक्र के कारण, न्याय और निवारण के बारे में निंदक और संशय की भावना है जो कि रेगिस्तान में एक मृगतृष्णा की तरह मायावी और भ्रांतिजनक है।

(रागिनी विवेक कुमार द्वारा इस अंग्रेजी लेख का हिंदी अनुवाद)


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