विरोध के बाद हटा सत्यनारायण की कथा फिल्म का शीर्षक

ऐसा लगता है जैसे फिल्म उद्योग ने कसम खा रखी है, हिन्दू भावनाओं को आहत करने की और हिन्दुओं को कुछ भी न समझने की। परन्तु समय के साथ अब जैसे जैसे लोग जागृत हो रहे हैं, वैसे वैसे इस एकतरफा सेक्युलरिज्म का विरोध हो रहा है। हाल ही में कार्तिक आर्यन स्टारर फिल्म की घोषणा हुई थी। और इस फिल्म का शीर्षक साजिद नाडियावाला ने रखा था “सत्यनारायण की कथा।”

सुनने में यहे लगेगा कि यह फिल्म सत्यनारायण की कथा पर होगी, परन्तु यह तो कुछ और ही थी। जैसे ही इस फिल्म की घोषणा हुई थी, इस शीर्षक का विरोध शुरू हो गया था। कई धार्मिक संगठन भी विरोध में उतर आए थे और जम कर इसका विरोध हो रहा था। यहाँ तक कि भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने तो साजिद नाडियावाला को चेतावनी दे दी थी कि वह फिल्म का शीर्षक बदलें।

उन्होंने कहा था कि  यह लोग हिंदुओंके देवी देवताओं के नाम या कथाओं को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं। और उन्होंने कहा था कि हिन्दू आपसे आवेदन और निवेदन करता है, मगर दूसरे धर्मों के बारे में बोलेंगे तो आपको जिंदा ही नहीं छोड़ेंगे। फिर उन्होंने कहा था कि वैसे तो सनातन धर्म की संस्कृति है कि हम किसी को कष्ट नहीं देंगे, मगर जब हमें निरंतर कष्ट ही देते रहेंगे तो उसे छोड़ेंगे नहीं।

भोपाल में फिल्म का विरोध करते हुए नाडियावाला के पोस्टर को गधे के चेहरे पर लगाया गया था।

इसके साथ ही ट्विटर पर भी काफी विरोध का सामना करना पड़ा था और लोगों ने कहा था कि कहीं कार्तिक आर्यन के फ़िल्मी कैरियर की यह अंतिम फिल्म न हो!

शायद यही कारण था कि कल रात को समीर विद्वांस ने यह घोषणा की कि वह इस फिल्म का टाइटल बदल रहे हैं। उन्होंने लिखा कि किसी भी फिल्म का शीर्षक काफी रचनात्मक प्रक्रिया के बाद आता है। हमने अपनी हालिया फिल्म सत्यनारायण की कथा’ के शीर्षक को बदलने का निर्णय लिया है, जिससे किसी के भी धार्मिक विचारों को ठेस न लगे।

फिर उन्होंने लिखा है, कि हालांकि जो भी हुआ था, वह जानबूझकर नहीं किया था, अनजाने में हुआ था। और इस फिल्म के निर्माताओं और रचनात्मक टीम ने मिलकर यह निर्णय लिया है। हम अपनी इस फिल्म का शीर्षक जल्दी घोषित करेंगे

इस पर ट्विटर पर लोग प्रश्न कर रहे हैं कि “क्या अनजाने में आप किसी और धर्म के बारे में ऐसा कुछ कर सकते हैं?”

एक यूजर ने पूछा कि “अनजाने में केवल हिन्दू भावनाओं को ही आहत क्यों किया जाता है, एक बार भी बॉलीवुड ने मुस्लिम या ईसाई भावनाओं को अनजाने में आहत नहीं किया है,”

वहीं कुछ लोगों ने फिल्म के बहिष्कार की भी बात कही।

बॉलीवुड ने हमेशा ही हिन्दू धर्म की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है, यह भी उसी कड़ी का एक हिस्सा था, परन्तु जनता के गुस्से के आगे यद्यपि निर्माता झुके हैं।


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