दिल्ली में मस्जिद में बच्ची के साथ बलात्कार और लिबरल सन्नाटा

नई दिल्ली में रविवार शाम को एक बारह साल की बच्ची मस्जिद में पानी लेने गयी और वहां पर उसके साथ मस्जिद के मौलवी ने बलात्कार कर लिया।  जिसे गाज़ियाबाद के लोनी से गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली पुलिस ने दिनांक 1 जून 2021 को इस घटना के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान की थी।

पूरी घटना इस प्रकार थी कि बारह साल की बच्ची का बलात्कार एक मस्जिद में मौलवी ने किया, जब वह मस्जिद में पानी लेने के लिए गयी थी। जब वह बच्ची घर पर पहुँची तो उसने अपने अपनी कहानी अपने मातापिता को बताई। फिर उसके मातापिता ने रविवार रात को ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

बच्ची के मातापिता की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और मंगलवार को पुलिस ने आरोपी मौलवी इलियास को गाज़ियाबाद के लोनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया। आरोपी मौलवी राजस्थान के भरतपुर का रहने वाला है। इससे पहले स्थानीय लोगों ने इस घटना की जानकारी मिलने पर प्रदर्शन भी किया था।

आरोपी मौलवी को इन्डियन पेनल कोड की धारा 376 के अंतर्गत एवं पोक्सो अधिनियम की सम्बन्धित धाराओं में हिरासत में लिया गया है।

हालांकि मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया है परन्तु सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गयी है। आज ट्विटर पर कई यूज़र्स ने इस बात पर आपत्ति दर्ज की कि डासना में मंदिर में एक लड़के को मारा गया तो शोर मच गया और पूरे विश्व में भारत को बदनाम कर दिया गया, परन्तु मस्जिद में एक बच्ची के साथ बलात्कार हो गया, तो उस पर कोई नहीं बोल रहा है। आखिर ऐसा क्यों? यह दोगला रवैया क्यों? सुदर्शन चैनल तो बिंदास बोल ही इस विषय पर किया:

विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने चुनिन्दा चुप्पी पर प्रश्न उठाते हुए ट्वीट किया कि

दिल्ली में मस्जिद के अंदर 10 साल की बच्ची से 50 साल के दुष्ट मौलाना इलियास ने किया दुष्कर्म। मेडिकल रिपोर्ट में हैवानियत की पुष्टि पर भी सभी सैक्युलररिष्ट जिहादी मौलवी उलेमा सोनिया राहुल केजरी ममता माया मौन??

ऐसे ही विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं भारतीय धरोहर एवं हिन्दू विश्व पत्रिका के सम्पादक विजय शकर तिवारी ने भी यही प्रश्न किया है कि कठुआ पर हाय तौबा करने वाले दिल्ली की मस्जिद में बच्ची के साथ रेप करने वाले मौलवी पर मौन क्यों?

एक यूजर ने प्रश्न किया कि कठुआ काण्ड पर गला फाड़ चिल्लाने वाली हिन्दू धर्म को बदनाम करने वाली तख्ती गैंग दिल्ली में मस्जिद के अंदर हुए बलात्कार पर चुप क्यों?

निर्दोष हिन्दू संतों पर पागलों की तरह व्यवहार करने वाले मीडिया की चुप्पी पर प्रश्न उठाते हुए एक यूजर से प्रश्न किया कि मीडिया मौलवी के दुराचार पर पूँछ दबाकर क्यों चुप है?

रैशेल व्हाईट, मॉडल, एक्टर और हेयरस्टाइलिस्ट ने भी संतुलन पर बात करते हुए लिखा कि Balance whats imbalanced ! Humanity and Law above any religion !

इसी के साथ आज दिन भर ट्विटर पर #STOP_RAPING_IN_MOSQUE का भी ट्रेंड चला। लोगों के भीतर सेलेब्रिटीज के दोहरे रवैये को लेकर आक्रोश है और यह आक्रोश इसलिए है क्योंकि कठुआ में सभी ने देखा था कि कैसे सेलेब्रिटीज और लेखक एवं निष्पक्ष पत्रकार मंदिरों पर ही ताने मारने लगे थे। उन्होंने सभी मंदिरों को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने कठुआ के बहाने पूरे हिन्दू धर्म को अपमानित किया था। उन्होंने सभी देवताओं को बलात्कारी साबित करने का कुप्रयास किया था।

परन्तु उन्होंने इस मस्जिद वाली घटना पर संज्ञान नहीं लिया है? यहाँ तक कि वह मदरसों में होने वाले यौन शोषण पर भी अपना मुंह नहीं खोलते हैं। पिछले वर्ष कई ऐसे मामले सामने आए थे जिनमें मदरसों में छोटे बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा था, पर कोई भी अभियान नहीं चलाया गया था। यहाँ तक कि वर्ष 2018 में गाज़ियाबाद में एक मस्जिद में एक हिन्दू लड़की के साथ बलात्कार किया था, मगर उसके लिए उन्होंने कोई अभियान नहीं चलाया था, बल्कि इसके स्थान पर इसी बात पर बल दिया गया था कि वह बच्ची अपने मन से उस लड़के के साथ गयी थी।

मामला जब सोशल मीडिया पर छाया तो पहले यह कहने का प्रयास किया गया कि आरोपी नाबालिग है। पर शीघ्र ही यह झूठ भी पकड़ा गया, जब बोन ओसिफिकेशन टेस्ट से पता चला था कि बलात्कार का आरोपी नाबालिग नहीं है।

लिब्रल्स की यह दुनिया बहुत घातक है, जिसमें इनके अनुसार ही शोर मचता है।  मजहब विशेष पर बात करने पर यह लोग डर जाते हैं क्योंकि इन्हें याद आ जाता है कि मजहब की बुराई की सजा क्या है “सिर तन से जुदा!” इसलिए यह लोग न ही मस्जिद और न ही मदरसों में होने वाले उन अपराधों पर बोलते हैं, जिनका शिकार छोटे बच्चे होते है। कथित प्रगतिशील समाज हिन्दुओं से हर स्तर पर घृणा करने वाला और मजहबियों से डरने वाला समाज है!


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