रश्मि सामंत: हिन्दूफोबिया के खिलाफ एक सशक्त हिन्दू स्वर

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय ने रश्मि सामंत के मामले में अपना निर्णय देते हुए यह माना है कि रश्मि सामंत को धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया था।

फरवरी में रश्मि सामंत चर्चा में आईं थीं, जब उन्हें ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में छात्र संघ में पहली महिला अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। रश्मि ने इसी वर्ष 11 फरवरी को हुए चुनावों में “अनौपनिवेशवाद और समावेश” के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था।  परन्तु उनका इस मुद्दे पर जीतना एक बड़े वर्ग को रास नहीं आया था और उसने रश्मि सामंत के अतीत और उनके धर्म के आधार पर शोर मचाना शुरू कर दिया था।

गौरतलब है कि यह अभियान किसी और ने नहीं बल्कि ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के ही एक प्रोफ़ेसर अभिजीत सरकार ने चलाया था। और यह घृणा से भरा हुआ अभियान किसी रश्मि सामंत के खिलाफ न होकर पूरे हिन्दू समाज और हिन्दू धर्म के खिलाफ था। उन्होंने रश्मि के परिवार द्वारा राम मंदिर के प्रति प्रेम व्यक्त करने पर प्रश्न उठाए थे और रश्मि की व्यक्तिगत तस्वीर को अपने घृणा के लिए साझा किया था।

अपने इन्स्टाग्राम पर एक तस्वीर लगते हुए अभिजीत ने कहा था कि “यह एक वायरल फोटो है, जिसमें रश्मि के रिश्तेदार, संभवतया उनके मातापिता, उस मंदिर के निर्माण का उत्सव मना रहे हैं, जो एक मस्जिद को ध्वस्त करके बना है। वह  कर्नाटक में मनिपाल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलोजी से ऑक्सफोर्ड आई हैं, जिस संस्थान की आधिकारिक वेबसाईट पर प्रधानमंत्री मोदी का चित्र लगा हुआ है। और वह तटीय कर्णाटक से आई है जो इन दिनों इस्लाम से घृणा करने वाली हिंदुत्ववादी शक्तियों का केंद्र बना हुआ है। और उसके अभियान में काफी पैसा खर्च हुआ है, वह किसने खर्च किया, जाहिर हैं, भारतीयों ने ही!”

उसके बाद कई हिन्दुफोबिया कमेंट आने के बाद और एक प्रकार से धर्म के आधार पर उनकी बुलींग होने के कारण रश्मि ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। रश्मि सामंत ने त्यागपत्र तो दिया, पर लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ी।

रश्मि का पक्ष रखने वाले आदित्य श्रीनिवासन ने ट्वीट किया कि

ऑक्सफ़ोर्ड ने रश्मि सामंत द्वारा दर्ज की गयी उत्पीडन की शिकायत में जांच पूरी कर ली है। मुझे खुशी है कि निर्णय आ गया गया है और मैं इस जांच के परिणाम से खुश हूँ।

और उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले कई महीने रश्मि सामंत के लिए भावनात्मक रूप से कमज़ोर करने वाले रहे होंगे और मैं इस पूरी प्रक्रिया में रश्मि सामंत की हिम्मत की सराहना करता हूँ।

फिर उन्होंने कहा कि अभी वह इतना ही बता सकते हैं,

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय स्वरों को व्यक्त करने वाली वेबसाईट ऑस्ट्रेलिया टुडे ने भी इस समाचार पर हर्ष व्यक्त किया है:

हिंदू एक्टिविस्ट इस समाचार से खुश हैं और अपनी अपनी खुशी व्यक्त कर रहे हैं।

फिर भी लोग यह अपेक्षा कर रहे हैं कि निर्णय जो भी आया है, वह सामने आए और पश्चिम में जिस तरह से हिन्दूफोबिया बढ़ रहा है, उस पर रोक लगे, जिससे रश्मि सामंत जैसी लड़कियों को इस भेदभाव का सामना न करना पड़े!

रश्मि सामंत ने ट्वीट करते हुए कहा कि


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